नई दिल्ली नगर पालिका परिषद् चरखा संग्रहालय


संग्रालय के बारे में

नई दिल्ली नगरपालिका परिषद् ने कनाट प्लेस में, खादी ग्रामोद्योग भवन के सामने पालिका पार्किंग के ऊपर पार्क में चरखा स्मारक बनाने के लिए के.वी. आई.सी. के साथ मिलकर सहयोग किया | राष्ट्रीय चरखा संग्रहालय का उदघाटन २१ मई २०१७ को हुआ | यह संग्रहालय भारतीय चरखे की महान विरासत की खिड़की है , जो आत्मनिर्भरता के दर्शन का साकार रूप है | न. दी. न. परिषद् ने २६ फ़ीट लम्बी (लगभग ८ मीटर ) चरखा संस्थापित किया है | यह १३ फ़ीट (लगभग चार मीटर) ऊँचा तथा लगभग ५ टन वज़न का है | यह चरखा, विश्व का सबसे बड़ा, उच्च कोटि के स्टेनलैस स्टील से बना है तथा ९ मीटर (लगभग ३० मीटर) लम्बा तथा ६ मीटर चौड़े खुले क्षेत्र में स्थापित किए गए है | यह इस प्रकार बनाया गए है जिससे कि वह सभी मौसमों, जैसे, सूर्ये, वर्षा, धुंध/धुंध , हवा, आंधी, तूफान, आदि स्थितियों का सामना कर सकें | भव्य मौसम-रोधी स्मारक राष्ट्रव्यापी प्रतीक के रूप में चरखा का निरंतर महत्व बटरे हैं|

चरखा संग्रहालय, राष्ट्रवाद, स्वतंत्रता आन्दौलन तथा स्वदेशी कपडा बुनाई द्वारा व्यक्तिगत नागरिकों के सशक्तिकरण के चिन्ह के रूप में एक सामान्य साधन से चरखा का इतिहास एवं विकास, को दर्शाता है | आज यह पुनः आत्मनिर्भरता के सन्देश को प्रतिध्वनित करता है तथा वास्तविक कौशल प्राप्त करने हेतु "मेन इन इंडिया" के लिए प्रेरित करता है |

संग्रहालय, केपास' से यार्न, यार्न' से 'खादी कपड़ा' तक की यात्रा को दर्शाता है तथा १४ प्रकार के मॉडल प्रदर्शन-मंजूषा में है | संग्रहालय माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा लुधियाना में खादी के लिए बुना गया चरखा भी है, जहाँ उन्होंने पंजाब की महिलाओं को ५०० चरखा भी वितरित किये |


माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा चरखा संग्रहालय के संबंध में संदेश



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